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लेखनी प्रतियोगिता -26-Aug-2022

हाथों की लकीरों का पता नही
मुझे माथे का तकदीर बनना है


जो मिटे नही मिटने पर
मुझे वो अमिट पहचान बनाना है


मुझे सूरज की तपिश के साथ
खूबसूरत चांदनी रात बनना है


नही बनना मुझे किसी की उलझन
मुझे खुली सांस बनना है


मुझे तारों की गर्दिश नही
एक चमकता ख्वाब बनना है


जहा खुशियां मिले सभी को
मुझे वो एहसास बनना है


                   __ श्रद्धा पाण्डेय
                       

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27 Comments

Chetna swrnkar

27-Aug-2022 08:44 PM

Nice

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Shraddha Pandey

28-Aug-2022 07:01 AM

TQ☺️

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shweta soni

27-Aug-2022 07:32 PM

Nice

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Shraddha Pandey

27-Aug-2022 08:04 PM

Tq🤩

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